Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.87.4: हे देवश्रेष्ठ! वेद और धर्म का नाश न हो, इसके लिए मैंने पहले ही उपाय कर लिया है। अतः आपकी मानसिक चिन्ता दूर हो जाए॥4॥ | mahabharat अध्याय 13.87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे देवश्रेष्ठ! वेद और धर्म का नाश न हो, इसके लिए मैंने पहले ही उपाय कर लिया है। अतः आपकी मानसिक चिन्ता दूर हो जाए॥4॥
O best of the gods! I have already taken measures to ensure that the Vedas and Dharma are not destroyed. Therefore, your mental anxiety should be dispelled. ॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥