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mahabharat 13.87.30: हे महाबाहु! हे महाबाहु! उस समय देवताओं ने मेंढकों पर जो कृपा की थी, वह मैं तुमसे कह रहा हूँ। सुनो।   |   mahabharat अध्याय 13.87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  13.87.30 
देवास्त्वनुग्रहं चक्रुर्मण्डूकानां भृगूत्तम।
यत्तच्छृणु महाबाहो गदतो मम सर्वश:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
हे महाबाहु! हे महाबाहु! उस समय देवताओं ने मेंढकों पर जो कृपा की थी, वह मैं तुमसे कह रहा हूँ। सुनो।
 
O great Bhrigu! O mighty-armed one! I am telling you all about the kindness shown by the gods to the frogs at that time. Listen.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)