Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.87.3: ब्रह्माजी बोले - मैं सभी जीवों के प्रति समान भाव रखता हूँ, तथापि अधर्म मुझे प्रिय नहीं है; अतः आप लोग देवताओं और ऋषियों को कष्ट देने वाले तारकासुर का शीघ्र ही वध कर दीजिए॥3॥ | mahabharat अध्याय 13.87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्रह्माजी बोले - मैं सभी जीवों के प्रति समान भाव रखता हूँ, तथापि अधर्म मुझे प्रिय नहीं है; अतः आप लोग देवताओं और ऋषियों को कष्ट देने वाले तारकासुर का शीघ्र ही वध कर दीजिए॥3॥
Brahmaji said - I have equal feelings towards all living beings, however I do not like unrighteousness; Therefore, you people should quickly kill Tarakasura, who is troubling the gods and sages. 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥