Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.87.166: भीष्म कहते हैं, "युधिष्ठिर! वसिष्ठ की यह बात सुनकर महाबली परशुराम ने ब्राह्मणों को स्वर्ण दान दिया। ऐसा करने से वे अपने सभी पापों से मुक्त हो गए।" | mahabharat अध्याय 13.87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीष्म उवाच
इत्युक्त: स वसिष्ठेन जामदग्न्य: प्रतापवान्।
ददौ सुवर्णं विप्रेभ्यो व्यमुच्यत च किल्बिषात्॥ १६६॥
अनुवाद
भीष्म कहते हैं, "युधिष्ठिर! वसिष्ठ की यह बात सुनकर महाबली परशुराम ने ब्राह्मणों को स्वर्ण दान दिया। ऐसा करने से वे अपने सभी पापों से मुक्त हो गए।"
Bhishma says- Yudhishthira! On hearing Vasishtha say this, the mighty Parashurama donated gold to the Brahmins. By doing this, they got rid of all their sins.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥