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mahabharat 13.87.15: महापुरुषों के शापों का महापुरुषों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। साधारण मनुष्य कितना ही बलवान क्यों न हो, परम बलवान के साथ मिलकर वह दुर्बल हो जाता है ॥15॥   |   mahabharat अध्याय 13.87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  13.87.15 
न हि तेजस्विनां शापास्तेज:सु प्रभवन्ति वै।
बलान्यतिबलं प्राप्य दुर्बलानि भवन्ति वै॥ १५॥
 
 
अनुवाद
महापुरुषों के शापों का महापुरुषों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। साधारण मनुष्य कितना ही बलवान क्यों न हो, परम बलवान के साथ मिलकर वह दुर्बल हो जाता है ॥15॥
 
The curses of illustrious men do not have any effect on illustrious people. No matter how strong an ordinary person is, he becomes weak on meeting an extremely powerful person. ॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)