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mahabharat 13.87.127: इस प्रकार ये तीनों प्रजापति हैं और शेष सब उनकी संतानें हैं। यह सम्पूर्ण जगत् उनकी संतान है, इसे तुम अच्छी तरह समझ लो॥127॥   |   mahabharat अध्याय 13.87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध  »  श्लोक 127
 
 
श्लोक  13.87.127 
एते हि प्रस्रवा: सर्वे प्रजानां पतयस्त्रय:।
सर्वं संतानमेतेषामिदमित्युपधारय॥ १२७॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार ये तीनों प्रजापति हैं और शेष सब उनकी संतानें हैं। यह सम्पूर्ण जगत् उनकी संतान है, इसे तुम अच्छी तरह समझ लो॥127॥
 
Thus, these three are Prajapatis and all the rest are their children. This entire world is their progeny, you must understand this well.॥ 127॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)