Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.87.117: हे देवों! जो तीन पुरुष पहले प्रकट हुए थे - भृगु, अंगिरा और कवि - वे मेरे ही पुत्र हैं, इसमें संशय नहीं है। इसे आप जान लीजिए; क्योंकि इस यज्ञ का जो भी फल होगा, वह मेरा ही अधिकार है।॥117॥   |   mahabharat अध्याय 13.87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध  »  श्लोक 117
 
 
श्लोक  13.87.117 
त्रीणि पूर्वाण्यपत्यानि मम तानि न संशय:।
इति जानीत खगमा मम यज्ञफलं हि तत्॥ ११७॥
 
 
अनुवाद
हे देवों! जो तीन पुरुष पहले प्रकट हुए थे - भृगु, अंगिरा और कवि - वे मेरे ही पुत्र हैं, इसमें संशय नहीं है। इसे आप जान लीजिए; क्योंकि इस यज्ञ का जो भी फल होगा, वह मेरा ही अधिकार है।॥117॥
 
O celestial gods! The three men who appeared first, Bhrigu, Angira and Kavi, are my sons, there is no doubt about this. You should know this; because whatever is the result of this sacrifice, it is my right.'॥ 117॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)