Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.87.112: उस यज्ञ में प्रयुक्त की गई लकड़ियाँ और उनसे निकला हुआ रस ही मास, पक्ष, दिन, रात और शुभ मुहूर्त बन गए। अग्नि का पित्त भयंकर चमक के साथ प्रकट हुआ ॥112॥ | mahabharat अध्याय 13.87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस यज्ञ में प्रयुक्त की गई लकड़ियाँ और उनसे निकला हुआ रस ही मास, पक्ष, दिन, रात और शुभ मुहूर्त बन गए। अग्नि का पित्त भयंकर चमक के साथ प्रकट हुआ ॥112॥
The firewood used in that sacrifice and the juice that came out of them became the months, fortnights, days, nights and auspicious moments. The bile of the fire appeared in a fierce glow. ॥112॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥