Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.87.107: उस अग्नि की ज्वाला से मरीचि उत्पन्न हुए, जिनके पुत्र मारीच-कश्यप के नाम से प्रसिद्ध हैं। हे प्रिये! अंगारों से अंगिरा उत्पन्न हुए और कुशा के ढेर से वाल्खिल्य नामक ऋषि उत्पन्न हुए। | mahabharat अध्याय 13.87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस अग्नि की ज्वाला से मरीचि उत्पन्न हुए, जिनके पुत्र मारीच-कश्यप के नाम से प्रसिद्ध हैं। हे प्रिये! अंगारों से अंगिरा उत्पन्न हुए और कुशा के ढेर से वाल्खिल्य नामक ऋषि उत्पन्न हुए।
From the flames of that fire, Marichi was born; whose sons are famous by the names of Marich-Kashyap. O dear! From the embers, Angira was born and from the heap of Kusha grass, a sage named Valkhilya was born.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥