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श्लोक 13.86.82  |
ते दीनमनस: सर्वे देवता ऋषयश्च ये।
प्रजग्मु: शरणं देवं ब्रह्माणमजरं विभुम्॥ ८२॥ |
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| अनुवाद |
| वे सब देवता और ऋषिगण विनीत होकर अविनाशी एवं सर्वव्यापी देवता भगवान ब्रह्मा की शरण में गए ॥82॥ |
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| All those gods and sages became humble and took refuge in Lord Brahma, the immortal and omnipresent deity. 82॥ |
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इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि सुवर्णोत्पत्तिर्नाम चतुरशीतितमोऽध्याय:॥ ८४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें सुवर्णकी उत्पत्ति नामक चौरासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८४॥
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