श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 86: भीष्मजीका अपने पिता शान्तनुके हाथमें पिण्ड न देकर कुशपर देना, सुवर्णकी उत्पत्ति और उसके दानकी महिमाके सम्बन्धमें वसिष्ठ और परशुरामका संवाद, पार्वतीका देवताओंको शाप, तारकासुरसे डरे हुए देवताओंका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  13.86.80 
आदित्या वसवो रुद्रा मरुतोऽथाश्विनावपि।
साध्याश्च सर्वे संत्रस्ता दैतेयस्य पराक्रमात्॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
आदित्य, वसु, रुद्र, मरुद्गण, अश्विनीकुमार और साध्य - सभी देवता उस दैत्य के पराक्रम से भयभीत हो गए ॥80॥
 
Aditya, Vasu, Rudra, Marudgan, Ashwini Kumar and Sadhya - all the gods were frightened by the bravery of that demon. 80॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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