श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 86: भीष्मजीका अपने पिता शान्तनुके हाथमें पिण्ड न देकर कुशपर देना, सुवर्णकी उत्पत्ति और उसके दानकी महिमाके सम्बन्धमें वसिष्ठ और परशुरामका संवाद, पार्वतीका देवताओंको शाप, तारकासुरसे डरे हुए देवताओंका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  13.86.79 
एतस्मिन्नेव काले तु देवा: शक्रपुरोगमा:।
असुरस्तारको नाम तेन संतापिता भृशम्॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
इसी समय तारक नामक एक राक्षस उत्पन्न हुआ, जिसने इन्द्र सहित देवताओं को बहुत कष्ट पहुँचाया।
 
At this time a demon named Taraka was born who greatly distressed the gods including Indra. 79.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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