श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 86: भीष्मजीका अपने पिता शान्तनुके हाथमें पिण्ड न देकर कुशपर देना, सुवर्णकी उत्पत्ति और उसके दानकी महिमाके सम्बन्धमें वसिष्ठ और परशुरामका संवाद, पार्वतीका देवताओंको शाप, तारकासुरसे डरे हुए देवताओंका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  13.86.71 
इति तेषां कथयतां भगवान‍् वृषभध्वज:।
एवमस्त्विति देवांस्तान् विप्रर्षे प्रत्यभाषत॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
विप्रर्षे! देवताओं के ऐसा कहने पर भगवान वृषभध्वज ने उनसे कहा 'एवमस्तु'। 71॥
 
Viprarshe! When the gods said this, Lord Vrishabhdhwaj said to them 'Evamastu'. 71॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)