श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 86: भीष्मजीका अपने पिता शान्तनुके हाथमें पिण्ड न देकर कुशपर देना, सुवर्णकी उत्पत्ति और उसके दानकी महिमाके सम्बन्धमें वसिष्ठ और परशुरामका संवाद, पार्वतीका देवताओंको शाप, तारकासुरसे डरे हुए देवताओंका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  13.86.7 
किं सुवर्णं कथं जातं कस्मिन् काले किमात्मकम्।
किं दैवं किं फलं चैव कस्माच्च परमुच्यते॥ ७॥
 
 
अनुवाद
सोना क्या है? इसकी उत्पत्ति कब और कैसे हुई? सोने का पदार्थ क्या है? इसका देवता कौन है? इसे दान करने का क्या फल है? सोने को सर्वश्रेष्ठ क्यों कहा गया है?॥7॥
 
What is gold? When and how did it originate? What is the material of gold? Who is its god? What is the result of donating it? Why is gold called the best?॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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