Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.86.63-64h: हे महाबली भृगु! वहाँ सबने उन दोनों के चरणों में मस्तक नवाकर उन्हें प्रसन्न किया और भगवान रुद्र से कहा - 'पापरहित महादेव! देवी पार्वती के साथ आपका यह मिलन तपस्वी का तपस्विनी स्त्री के साथ तथा अत्यंत तेजस्वी का तेजस्वी स्त्री के साथ मिलन जैसा है।' | mahabharat अध्याय 13.86: भीष्मजीका अपने पिता शान्तनुके हाथमें पिण्ड न देकर कुशपर देना, सुवर्णकी उत्पत्ति और उसके दानकी महिमाके सम्बन्धमें वसिष्ठ और परशुरामका संवाद, पार्वतीका देवताओंको शाप, तारकासुरसे डरे हुए देवताओंका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे महाबली भृगु! वहाँ सबने उन दोनों के चरणों में मस्तक नवाकर उन्हें प्रसन्न किया और भगवान रुद्र से कहा - 'पापरहित महादेव! देवी पार्वती के साथ आपका यह मिलन तपस्वी का तपस्विनी स्त्री के साथ तथा अत्यंत तेजस्वी का तेजस्वी स्त्री के साथ मिलन जैसा है।'
O great Bhrigu! There, all of them bowed their heads at the feet of both of them and pleased them and said to Lord Rudra - 'Sinless Mahadev! This union of yours with Goddess Parvati is the union of an ascetic with an ascetic female and a very radiant one with a radiant female. 63 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥