vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 86: भीष्मजीका अपने पिता शान्तनुके हाथमें पिण्ड न देकर कुशपर देना, सुवर्णकी उत्पत्ति और उसके दानकी महिमाके सम्बन्धमें वसिष्ठ और परशुरामका संवाद, पार्वतीका देवताओंको शाप, तारकासुरसे डरे हुए देवताओंका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना
»
श्लोक 40
श्लोक
13.86.40
यदि वोऽनुग्रहकृता बुद्धिर्मां प्रति सत्तमा:।
प्रब्रूत पावनं किं मे भवेदिति तपोधना:॥ ४०॥
अनुवाद
हे मुनियों! तपस्वियों! यदि आप सब मुझ पर कृपा करना चाहते हैं, तो मुझे बताइए कि मेरी शुद्धि का क्या उपाय है?॥40॥
O sages! Ascetics! If you all wish to bestow your favour upon me, then tell me, what is the means to purify me?'॥ 40॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd