श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 86: भीष्मजीका अपने पिता शान्तनुके हाथमें पिण्ड न देकर कुशपर देना, सुवर्णकी उत्पत्ति और उसके दानकी महिमाके सम्बन्धमें वसिष्ठ और परशुरामका संवाद, पार्वतीका देवताओंको शाप, तारकासुरसे डरे हुए देवताओंका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  13.86.10 
भीष्म उवाच
शृणु राजन्नवहितो बहुकारणविस्तरम्।
जातरूपसमुत्पत्तिमनुभूतं च यन्मया॥ १०॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, "हे राजन! ध्यानपूर्वक सुनो! सुवर्ण की उत्पत्ति का कारण बहुत विस्तृत है। इस विषय में मैं अपने अनुभव के अनुसार सब कुछ तुमसे कह रहा हूँ॥ 10॥
 
Bhishma said, "O King! Listen carefully! The reason for the origin of gold is very detailed. I am telling you everything according to my experience in this matter.॥ 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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