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mahabharat 13.85.51: पुत्र चाहने वाले को पुत्र और पुत्री चाहने वाले को पुत्री मिलती है। धन चाहने वाले को धन और धर्म चाहने वाले को धर्म मिलता है ॥ 51॥   |   mahabharat अध्याय 13.85: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गौओंका उत्कर्ष बताना और गौओंको वरदान देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 85: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गौओंका उत्कर्ष बताना और गौओंको वरदान देना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  13.85.51 
पुत्रार्थी लभते पुत्रं कन्यार्थी तामवाप्नुयात्।
धनार्थी लभते वित्तं धर्मार्थी धर्ममाप्नुयात्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
पुत्र चाहने वाले को पुत्र और पुत्री चाहने वाले को पुत्री मिलती है। धन चाहने वाले को धन और धर्म चाहने वाले को धर्म मिलता है ॥ 51॥
 
A man seeking a son gets a son and a man seeking a daughter gets a daughter. A man seeking wealth gets wealth and a man seeking religion gets religion. ॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)