Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.85.48-49: हे पुरुषसिंह! यदि इसका पाठ किया जाए, तो यह सब पापों से मुक्ति दिलाने वाला है। जो मनुष्य एकाग्रचित्त होकर यज्ञ और श्राद्ध में आहुति देते समय ब्राह्मणों को यह प्रसंग सुनाता है, उसके द्वारा दिया गया आहुति और तर्पण समस्त कामनाओं को पूर्ण करता है और अक्षय होकर पितरों को प्राप्त होता है। | mahabharat अध्याय 13.85: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गौओंका उत्कर्ष बताना और गौओंको वरदान देना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे पुरुषसिंह! यदि इसका पाठ किया जाए, तो यह सब पापों से मुक्ति दिलाने वाला है। जो मनुष्य एकाग्रचित्त होकर यज्ञ और श्राद्ध में आहुति देते समय ब्राह्मणों को यह प्रसंग सुनाता है, उसके द्वारा दिया गया आहुति और तर्पण समस्त कामनाओं को पूर्ण करता है और अक्षय होकर पितरों को प्राप्त होता है।
O purushsingh! If this is recited, it will liberate one from all sins. One who is focused and always narrates this episode to the Brahmins while offering oblations and offerings in yagnas and shraddhas, the oblations and offerings given by him will fulfill all desires and will reach the ancestors as they become inexhaustible.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥