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mahabharat 13.85.46: भीष्म कहते हैं - युधिष्ठिर! ब्रह्माजी की यह बात सुनकर सहस्र नेत्रों वाले इन्द्र प्रतिदिन गौओं की पूजा करने लगे। वे उनके प्रति बड़ा आदरभाव रखने लगे।   |   mahabharat अध्याय 13.85: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गौओंका उत्कर्ष बताना और गौओंको वरदान देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.85.46 
भीष्म उवाच
एतच्छ्रुत्वा सहस्राक्ष: पूजयामास नित्यदा।
गाश्चक्रे बहुमानं च तासु नित्यं युधिष्ठिर॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - युधिष्ठिर! ब्रह्माजी की यह बात सुनकर सहस्र नेत्रों वाले इन्द्र प्रतिदिन गौओं की पूजा करने लगे। वे उनके प्रति बड़ा आदरभाव रखने लगे।
 
Bhishma says - Yudhishthira! After listening to this statement of Brahma, the thousand eyed Indra started worshipping cows daily. He showed great respect towards them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)