Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.85.41-42h: वासव! वहाँ न तो कोई दुर्भाग्य है, न कोई अनिष्ट। वहाँ दिव्य वन, दिव्य महल और इच्छानुसार चलने वाले अत्यंत सुंदर विमान हैं। ॥41 1/2॥ | mahabharat अध्याय 13.85: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गौओंका उत्कर्ष बताना और गौओंको वरदान देना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न दैवं नाशुभं किंचिद् विद्यते तत्र वासव।
तत्र दिव्यान्यरण्यानि दिव्यानि भवनानि च॥ ४१॥
विमानानि सुयुक्तानि कामगानि च वासव।
अनुवाद
वासव! वहाँ न तो कोई दुर्भाग्य है, न कोई अनिष्ट। वहाँ दिव्य वन, दिव्य महल और इच्छानुसार चलने वाले अत्यंत सुंदर विमान हैं। ॥41 1/2॥
Vasava! There is neither any misfortune nor any evil there. There are divine forests, divine palaces and extremely beautiful aircrafts that move as per one's wish. ॥ 41 1/2 ॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥