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श्लोक  13.85.34 
सुरभ्युवाच
वरेण भगवन् मह्यं कृतं लोकपितामह।
एष एव वरो मेऽद्य यत् प्रीतोऽसि ममानघ॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
सुरभि बोली- हे प्रभु! हे जगत के निष्पाप पिता! मुझे कोई वरदान मांगने की आवश्यकता नहीं है। मेरे लिए सबसे बड़ा वरदान यही है कि आज आप मुझ पर प्रसन्न हों।
 
Surabhi said- O Lord! O sinless father of the world! I do not need to ask for a boon. The biggest boon for me is that you are pleased with me today.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)