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mahabharat 13.85.21: इस प्रकार गौएँ अपने कर्मों से ऋषियों और प्रजा का पालन करती हैं। वासव! उनके आचरण में कोई माया नहीं है। वे सदैव शुभ कर्मों में तत्पर रहती हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.85: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गौओंका उत्कर्ष बताना और गौओंको वरदान देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 85: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गौओंका उत्कर्ष बताना और गौओंको वरदान देना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  13.85.21 
मुनींश्च धारयन्तीह प्रजाश्चैवापि कर्मणा।
वासवाकूटवाहिन्य: कर्मणा सुकृतेन च॥ २१॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार गौएँ अपने कर्मों से ऋषियों और प्रजा का पालन करती हैं। वासव! उनके आचरण में कोई माया नहीं है। वे सदैव शुभ कर्मों में तत्पर रहती हैं।
 
‘In this way, cows support sages and subjects through their actions. Vasava! There is no illusion in their behavior. They are always engaged in good deeds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)