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mahabharat 13.85.19-20: इनसे ही यज्ञ पूर्ण होते हैं और हविओं का भी पूर्ण पालन होता है। सुरेश्वर! इन्हीं गायों से हमें दूध, दही और घी प्राप्त होता है। ये गायें अत्यन्त पवित्र हैं। ये बैल भूख-प्यास से पीड़ित होने पर भी नाना प्रकार के बोझ ढोते हैं।॥19-20॥   |   mahabharat अध्याय 13.85: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गौओंका उत्कर्ष बताना और गौओंको वरदान देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 85: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गौओंका उत्कर्ष बताना और गौओंको वरदान देना  »  श्लोक 19-20
 
 
श्लोक  13.85.19-20 
ततो यज्ञा: प्रवर्तन्ते हव्यं कव्यं च सर्वश:॥ १९॥
पयोदधिघृतं चैव पुण्याश्चैता: सुराधिप।
वहन्ति विविधान् भारान् क्षुत्तृष्णापरिपीडिता:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
इनसे ही यज्ञ पूर्ण होते हैं और हविओं का भी पूर्ण पालन होता है। सुरेश्वर! इन्हीं गायों से हमें दूध, दही और घी प्राप्त होता है। ये गायें अत्यन्त पवित्र हैं। ये बैल भूख-प्यास से पीड़ित होने पर भी नाना प्रकार के बोझ ढोते हैं।॥19-20॥
 
‘It is through them that the sacrifices are completed and the offerings of oblations are also completely maintained. Sureshwar! It is from these cows that we get milk, curd and ghee. These cows are very sacred. The bulls carry various types of loads even when they are suffering from hunger and thirst.॥19-20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)