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श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 84: लक्ष्मी और गौओंका संवाद तथा लक्ष्मीकी प्रार्थनापर गौओंके द्वारा गोबर और गोमूत्रमें लक्ष्मीको निवासके लिये स्थान दिया जाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  13.84.5 
इच्छाम त्वां वयं ज्ञातुं का त्वं क्व च गमिष्यसि।
तत्त्वेन वरवर्णाभे सर्वमेतद् ब्रवीहि न:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
इसलिए हम आपका परिचय जानना चाहते हैं। आप कौन हैं और कहाँ जाएँगी? वरवर्णिनी! ये सब बातें हमें ठीक-ठीक बताइए॥5॥
 
That is why we want to know your identity. Who are you and where will you go? Varavarnini! Tell us all these things precisely.॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)