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mahabharat 13.84.27: बेटा! इस प्रकार मैंने तुम्हें गोबर का महत्व बताया है। अब मैं तुम्हें पुनः गाय का महत्व बताता हूँ, सुनो।   |   mahabharat अध्याय 13.84: लक्ष्मी और गौओंका संवाद तथा लक्ष्मीकी प्रार्थनापर गौओंके द्वारा गोबर और गोमूत्रमें लक्ष्मीको निवासके लिये स्थान दिया जाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 84: लक्ष्मी और गौओंका संवाद तथा लक्ष्मीकी प्रार्थनापर गौओंके द्वारा गोबर और गोमूत्रमें लक्ष्मीको निवासके लिये स्थान दिया जाना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  13.84.27 
एवं गोशकृत: पुत्र माहात्म्यं तेऽनुवर्णितम्।
माहात्म्यं च गवां भूय: श्रूयतां गदतो मम॥ २७॥
 
 
अनुवाद
बेटा! इस प्रकार मैंने तुम्हें गोबर का महत्व बताया है। अब मैं तुम्हें पुनः गाय का महत्व बताता हूँ, सुनो।
 
Son! This is how I have told you the importance of cow dung. Now I am telling you again the importance of cows, listen.
 
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि श्रीगोसंवादो नाम द्वॺशीतितमोऽध्याय:॥ ८२॥
इसप्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें लक्ष्मी और गौओंका संवाद नामक बयासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८२॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)