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mahabharat 13.84.25: लक्ष्मी बोलीं - हे सुख देने वाली गौओं! मेरा सौभाग्य है कि तुमने मुझ पर कृपा की है। ऐसा ही होगा - मैं तुम्हारे गोबर और मूत्र में निवास करूँगी। तुमने मेरा आदर किया है, अतः तुम्हारा कल्याण हो।॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 13.84: लक्ष्मी और गौओंका संवाद तथा लक्ष्मीकी प्रार्थनापर गौओंके द्वारा गोबर और गोमूत्रमें लक्ष्मीको निवासके लिये स्थान दिया जाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 84: लक्ष्मी और गौओंका संवाद तथा लक्ष्मीकी प्रार्थनापर गौओंके द्वारा गोबर और गोमूत्रमें लक्ष्मीको निवासके लिये स्थान दिया जाना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  13.84.25 
श्रीरुवाच
दिष्ट्या प्रसादो युष्माभि: कृतो मेऽनुग्रहात्मक:।
एवं भवतु भद्रं व: पूजितास्मि सुखप्रदा:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मी बोलीं - हे सुख देने वाली गौओं! मेरा सौभाग्य है कि तुमने मुझ पर कृपा की है। ऐसा ही होगा - मैं तुम्हारे गोबर और मूत्र में निवास करूँगी। तुमने मेरा आदर किया है, अतः तुम्हारा कल्याण हो।॥ 25॥
 
Lakshmi said - O happiness-giving cows! I am fortunate that you have showered your kindness on me. It will be so - I will reside in your dung and urine. You have respected me, so may you prosper.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)