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mahabharat 13.84.24: हे यशस्विनी! हमें अवश्य ही तुम्हारा आदर करना चाहिए। तुम हमारे गोबर और मूत्र में निवास करती हो; क्योंकि हमारी ये दोनों वस्तुएँ परम पवित्र हैं। 24॥   |   mahabharat अध्याय 13.84: लक्ष्मी और गौओंका संवाद तथा लक्ष्मीकी प्रार्थनापर गौओंके द्वारा गोबर और गोमूत्रमें लक्ष्मीको निवासके लिये स्थान दिया जाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 84: लक्ष्मी और गौओंका संवाद तथा लक्ष्मीकी प्रार्थनापर गौओंके द्वारा गोबर और गोमूत्रमें लक्ष्मीको निवासके लिये स्थान दिया जाना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  13.84.24 
अवश्यं मानना कार्या तवास्माभिर्यशस्विनि।
शकृन्मूत्रे निवस त्वं पुण्यमेतद्धि न: शुभे॥ २४॥
 
 
अनुवाद
हे यशस्विनी! हमें अवश्य ही तुम्हारा आदर करना चाहिए। तुम हमारे गोबर और मूत्र में निवास करती हो; क्योंकि हमारी ये दोनों वस्तुएँ परम पवित्र हैं। 24॥
 
Good luck! Yashaswini! Of course we should respect you. You reside in our dung and urine; Because both these things of ours are most sacred. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)