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mahabharat 13.84.21: गौओं! मैं तुमसे आदर चाहता हूँ। तुम सदैव सबका कल्याण करती हो। यदि मुझे तुम्हारे किसी भी अंग में, यहाँ तक कि निचले घृणित अंग में भी स्थान मिले, तो मैं उसमें निवास करना चाहता हूँ। ॥21॥   |   mahabharat अध्याय 13.84: लक्ष्मी और गौओंका संवाद तथा लक्ष्मीकी प्रार्थनापर गौओंके द्वारा गोबर और गोमूत्रमें लक्ष्मीको निवासके लिये स्थान दिया जाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 84: लक्ष्मी और गौओंका संवाद तथा लक्ष्मीकी प्रार्थनापर गौओंके द्वारा गोबर और गोमूत्रमें लक्ष्मीको निवासके लिये स्थान दिया जाना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  13.84.21 
माननामहमिच्छामि भवत्य: सततं शिवा:।
अप्येकांगेष्वधो वस्तुमिच्छामि च सुकुत्सिते॥ २१॥
 
 
अनुवाद
गौओं! मैं तुमसे आदर चाहता हूँ। तुम सदैव सबका कल्याण करती हो। यदि मुझे तुम्हारे किसी भी अंग में, यहाँ तक कि निचले घृणित अंग में भी स्थान मिले, तो मैं उसमें निवास करना चाहता हूँ। ॥21॥
 
Cows! I want respect from you. You are always doing good to everyone. If I get a place in any of your body parts, even in the lower disgusting part, then I want to live in it. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)