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mahabharat 13.84.20: आप परम सौभाग्यशाली और सबके आश्रयदाता हैं। मैं भी आपकी शरण में आया हूँ। मैं आपका भक्त हूँ। मुझमें कोई दोष नहीं है, अतः आप मेरी रक्षा करें - मुझे अपना ही स्वीकार करें॥ 20॥   |   mahabharat अध्याय 13.84: लक्ष्मी और गौओंका संवाद तथा लक्ष्मीकी प्रार्थनापर गौओंके द्वारा गोबर और गोमूत्रमें लक्ष्मीको निवासके लिये स्थान दिया जाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 84: लक्ष्मी और गौओंका संवाद तथा लक्ष्मीकी प्रार्थनापर गौओंके द्वारा गोबर और गोमूत्रमें लक्ष्मीको निवासके लिये स्थान दिया जाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  13.84.20 
महाभागा भवत्यो वै शरण्या: शरणागताम्।
परित्रायन्तु मां नित्यं भजमानामनिन्दिताम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
आप परम सौभाग्यशाली और सबके आश्रयदाता हैं। मैं भी आपकी शरण में आया हूँ। मैं आपका भक्त हूँ। मुझमें कोई दोष नहीं है, अतः आप मेरी रक्षा करें - मुझे अपना ही स्वीकार करें॥ 20॥
 
You are extremely fortunate and a refuge for all. I have also come to your refuge. I am your devotee. There is no fault in me; therefore, please protect me – accept me as your own.॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)