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mahabharat 13.83.9: हे प्रभु! बुद्धिमान पुरुष किस कर्म से परमपद को प्राप्त होते हैं और देवतागण किस पुण्य कर्म से स्वर्ग का उपभोग करते हैं?॥9॥   |   mahabharat अध्याय 13.83: गौओंका माहात्म्य तथा व्यासजीके द्वारा शुकदेवसे गौओंकी, गोलोककी और गोदानकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 83: गौओंका माहात्म्य तथा व्यासजीके द्वारा शुकदेवसे गौओंकी, गोलोककी और गोदानकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  13.83.9 
किं च कृत्वा परं स्थानं प्राप्नुवन्ति मनीषिण:।
केन देवा: पवित्रेण स्वर्गमश्नन्ति वा विभो॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! बुद्धिमान पुरुष किस कर्म से परमपद को प्राप्त होते हैं और देवतागण किस पुण्य कर्म से स्वर्ग का उपभोग करते हैं?॥9॥
 
Lord! By which deed do wise men attain the highest place and by which pious act do the gods enjoy the heaven?॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)