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mahabharat 13.83.5-6h: युवनाश्व के पुत्र राजा मान्धाता, नहुष (सोमवंशी) और ययाति लाखों गौएँ दान में देते थे; ऐसा करने से उन्हें वे उत्तम लोक प्राप्त हुए जो देवताओं के लिए भी अत्यंत दुर्लभ हैं॥5 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.83: गौओंका माहात्म्य तथा व्यासजीके द्वारा शुकदेवसे गौओंकी, गोलोककी और गोदानकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 83: गौओंका माहात्म्य तथा व्यासजीके द्वारा शुकदेवसे गौओंकी, गोलोककी और गोदानकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 5-6h
 
 
श्लोक  13.83.5-6h 
मान्धाता यौवनाश्वश्च ययातिर्नहुषस्तथा।
गा वै ददन्त: सततं सहस्रशतसम्मिता:॥ ५॥
गता: परमकं स्थानं देवैरपि सुदुर्लभम्।
 
 
अनुवाद
युवनाश्व के पुत्र राजा मान्धाता, नहुष (सोमवंशी) और ययाति लाखों गौएँ दान में देते थे; ऐसा करने से उन्हें वे उत्तम लोक प्राप्त हुए जो देवताओं के लिए भी अत्यंत दुर्लभ हैं॥5 1/2॥
 
The sons of Yuvanashwa, King Mandhaata, Nahusha (of the Soma dynasty) and Yayati, used to give away lakhs of cows in charity; by doing this they attained those exalted abodes which are very rare even for the gods. ॥ 5 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)