Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.83.47: युधिष्ठिर! अपने पिता व्यासजी से यह बात सुनकर महाप्रतापी शुकदेवजी प्रतिदिन गौओं की पूजा करने लगे; अतः तुम्हें भी गौओं की पूजा करनी चाहिए। | mahabharat अध्याय 13.83: गौओंका माहात्म्य तथा व्यासजीके द्वारा शुकदेवसे गौओंकी, गोलोककी और गोदानकी महत्ताका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इत्युक्त: स महातेजा: शुक: पित्रा महात्मना।
पूजयामास गां नित्यं तस्मात् त्वमपि पूजय॥ ४७॥
अनुवाद
युधिष्ठिर! अपने पिता व्यासजी से यह बात सुनकर महाप्रतापी शुकदेवजी प्रतिदिन गौओं की पूजा करने लगे; अतः तुम्हें भी गौओं की पूजा करनी चाहिए।
Yudhishthira! Upon hearing this from his great father Vyasa, the very illustrious Sukadev started worshipping cows every day; therefore you should also worship cows.
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि गोप्रदानिके एकाशीतितमोऽध्याय:॥ ८१॥
इसप्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें गोदानविषयक इक्यासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८१॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥