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mahabharat 13.83.41: गौएँ अत्यंत पवित्र, पवित्र और पुण्यमयी हैं। वे महान् देवता हैं। उन्हें ब्राह्मणों को दान करने से मनुष्य स्वर्ग का सुख भोगता है ॥ 41॥   |   mahabharat अध्याय 13.83: गौओंका माहात्म्य तथा व्यासजीके द्वारा शुकदेवसे गौओंकी, गोलोककी और गोदानकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 83: गौओंका माहात्म्य तथा व्यासजीके द्वारा शुकदेवसे गौओंकी, गोलोककी और गोदानकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  13.83.41 
गाव: पवित्रा: पुण्याश्च पावनं परमं महत्।
ताश्च दत्त्वा द्विजातिभ्यो नर: स्वर्गमुपाश्नुते॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
गौएँ अत्यंत पवित्र, पवित्र और पुण्यमयी हैं। वे महान् देवता हैं। उन्हें ब्राह्मणों को दान करने से मनुष्य स्वर्ग का सुख भोगता है ॥ 41॥
 
Cows are extremely pure, holy and pious. They are great deities. By donating them to Brahmins, a man enjoys the bliss of heaven. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)