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mahabharat 13.83.37: शुद्ध घी के बल से देवता भी उत्तम लोकों का पालन करते हैं और जो घी समस्त शुद्ध वस्तुओं में परम पवित्र है, उसे मस्तक पर धारण करना चाहिए ॥37॥   |   mahabharat अध्याय 13.83: गौओंका माहात्म्य तथा व्यासजीके द्वारा शुकदेवसे गौओंकी, गोलोककी और गोदानकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 83: गौओंका माहात्म्य तथा व्यासजीके द्वारा शुकदेवसे गौओंकी, गोलोककी और गोदानकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  13.83.37 
येन देवा: पवित्रेण भुञ्जते लोकमुत्तमम्।
यत् पवित्रं पवित्राणां तद् घृतं शिरसा वहेत् ॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
शुद्ध घी के बल से देवता भी उत्तम लोकों का पालन करते हैं और जो घी समस्त शुद्ध वस्तुओं में परम पवित्र है, उसे मस्तक पर धारण करना चाहिए ॥37॥
 
Even the gods maintain the best of the worlds by the power of the pure ghee, and the ghee which is the most sacred of all the pure things, should be accepted on one's head. ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)