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mahabharat 13.83.33: जो मनुष्य गौओं की सेवा करता है और सब प्रकार से उनका पालन करता है, उस पर गौएँ प्रसन्न होकर उसे अत्यंत दुर्लभ वर देती हैं ॥33॥   |   mahabharat अध्याय 13.83: गौओंका माहात्म्य तथा व्यासजीके द्वारा शुकदेवसे गौओंकी, गोलोककी और गोदानकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 83: गौओंका माहात्म्य तथा व्यासजीके द्वारा शुकदेवसे गौओंकी, गोलोककी और गोदानकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  13.83.33 
गाश्च शुश्रूषते यश्च समन्वेति च सर्वश:।
तस्मै तुष्टा: प्रयच्छन्ति वरानपि सुदुर्लभान्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य गौओं की सेवा करता है और सब प्रकार से उनका पालन करता है, उस पर गौएँ प्रसन्न होकर उसे अत्यंत दुर्लभ वर देती हैं ॥33॥
 
The cows, pleased with the man who serves the cows and follows them in every way, grant him a very rare boon. ॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)