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mahabharat 13.83.31-32: नरेन्द्र! मनुष्य उन लोकों में जाता है, जो महाप्रतापी सूर्य और महाप्रतापी वायु द्वारा शासित हैं, तथा जिनके ऐश्वर्य की वंदना राजा वरुण करते हैं। गौएँ युगंधरा, सुरूपा, बहुरूपा, विश्वरूपा और सबकी माताएँ हैं। शुकदेव! मनुष्य को संयम का पालन करते हुए प्रतिदिन प्रजापति नामक इन गौओं के नामों का जप करना चाहिए। 31-32॥   |   mahabharat अध्याय 13.83: गौओंका माहात्म्य तथा व्यासजीके द्वारा शुकदेवसे गौओंकी, गोलोककी और गोदानकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 83: गौओंका माहात्म्य तथा व्यासजीके द्वारा शुकदेवसे गौओंकी, गोलोककी और गोदानकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 31-32
 
 
श्लोक  13.83.31-32 
येषामधिपति: पूषा मारुतो बलवान् बली।
ऐश्वर्ये वरुणो राजा नाममात्रं युगन्धरा:॥ ३१॥
सुरूपा बहुुरूपाश्च विश्वरूपाश्च मातर:।
प्राजापत्यमिति ब्रह्मन् जपेन्नित्यं यतव्रत:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
नरेन्द्र! मनुष्य उन लोकों में जाता है, जो महाप्रतापी सूर्य और महाप्रतापी वायु द्वारा शासित हैं, तथा जिनके ऐश्वर्य की वंदना राजा वरुण करते हैं। गौएँ युगंधरा, सुरूपा, बहुरूपा, विश्वरूपा और सबकी माताएँ हैं। शुकदेव! मनुष्य को संयम का पालन करते हुए प्रतिदिन प्रजापति नामक इन गौओं के नामों का जप करना चाहिए। 31-32॥
 
Narendra! Man goes to those worlds which are ruled by the mighty Sun and the mighty wind, and whose opulence is revered by King Varun. Cows are Yugandhara, Surupa, Bahurupa, Vishwarupa and mothers of all. Shukdev! Man should chant these names of cows called Prajapati daily while following the rules of restraint. 31-32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)