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mahabharat 13.83.3: हे भरतश्रेष्ठ! गायों से बढ़कर पवित्र कोई वस्तु नहीं है। वे पुण्यवान, पवित्र और तीनों लोकों में श्रेष्ठ हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.83: गौओंका माहात्म्य तथा व्यासजीके द्वारा शुकदेवसे गौओंकी, गोलोककी और गोदानकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 83: गौओंका माहात्म्य तथा व्यासजीके द्वारा शुकदेवसे गौओंकी, गोलोककी और गोदानकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  13.83.3 
न हि पुण्यतमं किंचिद् गोभ्यो भरतसत्तम।
एता: पुण्या: पवित्राश्च त्रिषु लोकेषु सत्तमा:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! गायों से बढ़कर पवित्र कोई वस्तु नहीं है। वे पुण्यवान, पवित्र और तीनों लोकों में श्रेष्ठ हैं।
 
O best of the Bharatas! There is nothing more sacred than cows. They are virtuous, pure and the best in the three worlds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)