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mahabharat 13.83.29: भरतनन्दन! वहाँ के यशस्वी और पुण्यवान लोग विचित्र और सुन्दर विमानों में बैठकर तथा बहुत यात्रा करके आनन्द का अनुभव करते हैं। 29॥   |   mahabharat अध्याय 13.83: गौओंका माहात्म्य तथा व्यासजीके द्वारा शुकदेवसे गौओंकी, गोलोककी और गोदानकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.83.29 
विमानेषु विचित्रेषु रमणीयेषु भारत।
मोदन्ते पुण्यकर्माणो विहरन्तो यशस्विन:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
भरतनन्दन! वहाँ के यशस्वी और पुण्यवान लोग विचित्र और सुन्दर विमानों में बैठकर तथा बहुत यात्रा करके आनन्द का अनुभव करते हैं। 29॥
 
Bharatnandan! The famous and virtuous people there experience joy by sitting in strange and beautiful planes and traveling extensively. 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)