Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.83.27: हे भरतश्रेष्ठ! वहाँ के वृक्ष सदैव पुष्प और फल देते रहते हैं। वे वृक्ष पक्षियों से भरे रहते हैं और उनके पुष्प और फल दिव्य सुगंध और दिव्य रस से युक्त होते हैं। | mahabharat अध्याय 13.83: गौओंका माहात्म्य तथा व्यासजीके द्वारा शुकदेवसे गौओंकी, गोलोककी और गोदानकी महत्ताका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे भरतश्रेष्ठ! वहाँ के वृक्ष सदैव पुष्प और फल देते रहते हैं। वे वृक्ष पक्षियों से भरे रहते हैं और उनके पुष्प और फल दिव्य सुगंध और दिव्य रस से युक्त होते हैं।
O best of the Bharatas! The trees there always bear flowers and fruits. Those trees are full of birds and their flowers and fruits have divine fragrance and divine juice.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥