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mahabharat 13.83.24: उन नदियों के तट पर शुद्ध मोती, अत्यंत प्रकाशमान रत्न और स्वर्ण प्रकट होते हैं॥24॥   |   mahabharat अध्याय 13.83: गौओंका माहात्म्य तथा व्यासजीके द्वारा शुकदेवसे गौओंकी, गोलोककी और गोदानकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 83: गौओंका माहात्म्य तथा व्यासजीके द्वारा शुकदेवसे गौओंकी, गोलोककी और गोदानकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  13.83.24 
निर्मलाभिश्च मुक्ताभिर्मणिभिश्च महाप्रभै:।
उद्भूतपुलिनास्तत्र जातरूपैश्च निम्नगा:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
उन नदियों के तट पर शुद्ध मोती, अत्यंत प्रकाशमान रत्न और स्वर्ण प्रकट होते हैं॥24॥
 
On the banks of those rivers, pure pearls, extremely luminous gems and gold appear. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)