Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.83.20: वहाँ की धरती रत्नों से भरी है। वहाँ की रेत काँच के चूर्ण के समान है। उस भूमि को छूना हर ऋतु में सुखद है। वहाँ धूल या कीचड़ का नामोनिशान नहीं है। वह भूमि पूर्णतः पावन है। | mahabharat अध्याय 13.83: गौओंका माहात्म्य तथा व्यासजीके द्वारा शुकदेवसे गौओंकी, गोलोककी और गोदानकी महत्ताका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वहाँ की धरती रत्नों से भरी है। वहाँ की रेत काँच के चूर्ण के समान है। उस भूमि को छूना हर ऋतु में सुखद है। वहाँ धूल या कीचड़ का नामोनिशान नहीं है। वह भूमि पूर्णतः पावन है।
The land there is full of gems. The sand there is like powdered glass. Touching that land is pleasant in all seasons. There is no trace of dust or mud there. That land is completely auspicious.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥