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mahabharat 13.83.16: ब्रह्माजी से वर पाकर गौएँ शुभ, हवि देने वाली, गुणों को उत्पन्न करने वाली, पवित्र, सौभाग्यशाली और दिव्य अंगों तथा गुणों से युक्त हो गईं॥16॥   |   mahabharat अध्याय 13.83: गौओंका माहात्म्य तथा व्यासजीके द्वारा शुकदेवसे गौओंकी, गोलोककी और गोदानकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 83: गौओंका माहात्म्य तथा व्यासजीके द्वारा शुकदेवसे गौओंकी, गोलोककी और गोदानकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  13.83.16 
ब्रह्मणा वरदत्तास्ता हव्यकव्यप्रदा: शुभा:।
पुण्या: पवित्रा: सुभगा दिव्यसंस्थानलक्षणा:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी से वर पाकर गौएँ शुभ, हवि देने वाली, गुणों को उत्पन्न करने वाली, पवित्र, सौभाग्यशाली और दिव्य अंगों तथा गुणों से युक्त हो गईं॥16॥
 
After receiving the boon from Brahmaji, the cows became auspicious, providers of oblations, breeders of virtues, are pure, fortunate and are blessed with divine organs and characteristics.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)