श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 82: गौओं तथा गोदानकी महिमा  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  13.82.14 
त्वचा लोम्नाथशृंगैर्वा वालै: क्षीरेण मेदसा।
यज्ञं वहति सम्भूय किमस्त्यभ्यधिकं तत:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
चमड़ा, रोएँ, सींग, पूँछ के रोएँ, दूध और चर्बी सहित गौ दूध, दही, घी आदि के द्वारा यज्ञ करती है; फिर उससे श्रेष्ठ और कौन सी वस्तु है? ॥14॥
 
Together with the skin, hair, horns, tail hair, milk and fat, the cow performs the yajna (sacrifice) by means of milk, curd, ghee etc.; so what other thing is superior to it? ॥14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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