श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 81: गौओंको तपस्याद्वारा अभीष्ट वरकी प्राप्ति तथा उनके दानकी महिमा, विभिन्न प्रकारके गौओंके दानसे विभिन्न उत्तम लोकोंमें गमनका कथन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  13.81.8 
तथैव सर्वभूतानां समतिष्ठन्त मूर्धनि।
समानवत्सां कपिलां धेनुं दत्वा पयस्विनीम्।
सुव्रतां वस्त्रसंवीतां ब्रह्मलोके महीेयते॥ ८॥
 
 
अनुवाद
ये सब प्राणियों के मस्तक पर स्थित हैं (अर्थात् ये श्रेष्ठ एवं पूजनीय हैं) जो मनुष्य दूध देने वाली सुलक्षणा कपिला गौ को आच्छादित करके श्यामवर्णी बछड़े सहित दान करता है, वह ब्रह्मलोक में सम्मानित होता है॥8॥
 
These are situated on the forehead of all living beings (i.e. they are the best and most worshipable). The person who covers the milk-giving cow Sulakshana Kapila and donates it along with the dark-skinned calf, is honored in Brahmalok. 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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