Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.81.5: जब उनकी तपस्या समाप्त हुई, तब स्वयं भगवान ब्रह्मा ने उन्हें आशीर्वाद दिया - 'हे गौओं! ऐसा ही हो - तुम्हारे मन में जो भी संकल्प हो, वह पूर्ण हो। तुम समस्त जगत के जीवों का उद्धार करती रहो।'॥5॥ | mahabharat अध्याय 13.81: गौओंको तपस्याद्वारा अभीष्ट वरकी प्राप्ति तथा उनके दानकी महिमा, विभिन्न प्रकारके गौओंके दानसे विभिन्न उत्तम लोकोंमें गमनका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ताभ्यो वरं ददौ ब्रह्मा तपसोऽन्ते स्वयं प्रभु:।
एवं भवत्विति प्रभुर्लोकांस्तारयतेति च॥ ५॥
अनुवाद
जब उनकी तपस्या समाप्त हुई, तब स्वयं भगवान ब्रह्मा ने उन्हें आशीर्वाद दिया - 'हे गौओं! ऐसा ही हो - तुम्हारे मन में जो भी संकल्प हो, वह पूर्ण हो। तुम समस्त जगत के जीवों का उद्धार करती रहो।'॥5॥
When their penance ended, Lord Brahma himself blessed them - 'O cows! May it be so - whatever resolve you have in your mind, may it be fulfilled. May you continue to save the living beings of the entire world.'॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥