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mahabharat 13.81.25: जो महापुरुष गौदान में तत्पर रहता है, उसकी सेवा में हजारों देवियाँ रमणीय वेषभूषा और सुन्दर नितंबों वाली रहती हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.81: गौओंको तपस्याद्वारा अभीष्ट वरकी प्राप्ति तथा उनके दानकी महिमा, विभिन्न प्रकारके गौओंके दानसे विभिन्न उत्तम लोकोंमें गमनका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 81: गौओंको तपस्याद्वारा अभीष्ट वरकी प्राप्ति तथा उनके दानकी महिमा, विभिन्न प्रकारके गौओंके दानसे विभिन्न उत्तम लोकोंमें गमनका कथन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  13.81.25 
तं चारुवेषा: सुश्रोण्य: सहस्रं सुरयोषित:।
रमयन्ति नरश्रेष्ठं गोप्रदानरतं नरम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
जो महापुरुष गौदान में तत्पर रहता है, उसकी सेवा में हजारों देवियाँ रमणीय वेषभूषा और सुन्दर नितंबों वाली रहती हैं।
 
Thousands of celestial nymphs with charming attire and beautiful buttocks enjoy the service of that great man who is devoted to the donation of cows. 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)