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श्लोक 13.81.24  |
गोप्रदानरतो याति भित्त्वा जलदसंचयान्।
विमानेनार्कवर्णेन दिवि राजन् विराजते॥ २४॥ |
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| अनुवाद |
| राजन! जो पुरुष भगवान् की गोद में प्रेमपूर्वक तत्पर रहता है, वह सूर्य के समान तेजस्वी विमान में बैठकर बादलों को चीरकर स्वर्ग में जाता है और शोभा पाता है॥24॥ |
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| Rajan! The man who remains ready with love in the lap of God, sits in a plane resplendent like the sun, pierces the clouds and goes to heaven and gets adorned. 24॥ |
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