श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 81: गौओंको तपस्याद्वारा अभीष्ट वरकी प्राप्ति तथा उनके दानकी महिमा, विभिन्न प्रकारके गौओंके दानसे विभिन्न उत्तम लोकोंमें गमनका कथन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  13.81.23 
दृतिकण्ठमनड्वाहं सर्वरत्नैरलंकृतम्।
दत्त्वा प्रजापतेर्लोकान् विशोक: प्रतिपद्यते॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जो ब्राह्मण को बहुमूल्य रत्नों से सुसज्जित, लटकते हुए कम्बल से युक्त तथा गाड़ी का बोझ खींचने में समर्थ बैल दान करता है, वह बिना किसी शोक के प्रजापति लोक को जाता है ॥23॥
 
He who gives to a Brahmana a bullock decorated with precious stones and having a hanging blanket and capable of pulling a cart's load, goes to the regions of Prajapati without any sorrow. ॥23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)