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mahabharat 13.81.17: जो मनुष्य तृण के धुएँ के समान रंग वाली, वस्त्र से ढकी हुई तथा कांसे के दूध के पात्र सहित बछड़े सहित गाय का दान करता है, वह पितरों के लोक में सम्मान प्राप्त करता है ॥ 17॥   |   mahabharat अध्याय 13.81: गौओंको तपस्याद्वारा अभीष्ट वरकी प्राप्ति तथा उनके दानकी महिमा, विभिन्न प्रकारके गौओंके दानसे विभिन्न उत्तम लोकोंमें गमनका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 81: गौओंको तपस्याद्वारा अभीष्ट वरकी प्राप्ति तथा उनके दानकी महिमा, विभिन्न प्रकारके गौओंके दानसे विभिन्न उत्तम लोकोंमें गमनका कथन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  13.81.17 
पलालधूम्रवर्णां तु सवत्सां कांस्यदोहनाम्।
प्रदाय वस्त्रसंवीतां पितृलोके महीयते॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य तृण के धुएँ के समान रंग वाली, वस्त्र से ढकी हुई तथा कांसे के दूध के पात्र सहित बछड़े सहित गाय का दान करता है, वह पितरों के लोक में सम्मान प्राप्त करता है ॥ 17॥
 
He who donates a cow with its calf whose colour is like the smoke of straw, covered with a cloth and along with a bronze milk pot, attains respect in the world of ancestors. ॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)